ऑपरेशन सिंदूर में शामिल जवान से मारपीट केस में NHAI का बड़ा एक्शन, टोल टैक्स एजेंसी का कॉन्ट्रैक्ट रद्ददेशभर में राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल प्लाजा पर अक्सर लोगों और टोल कर्मियों के बीच विवाद की घटनाएं सामने आती रहती हैं। लेकिन हाल ही में मेरठ-करनाल हाईवे पर जो घटना घटी, उसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। यह मामला इसलिए ज्यादा गंभीर हो गया क्योंकि इसमें सेना के जवान के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट हुई थी। यह जवान ऑपरेशन सिंदूर में शामिल रहा है और देश की सुरक्षा में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुका है। इस घटना ने लोगों में गुस्सा और आक्रोश दोनों ही पैदा किया।

इस मामले में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI ने कड़ा कदम उठाते हुए न सिर्फ टोल टैक्स एजेंसी का कॉन्ट्रैक्ट रद्द किया बल्कि एजेंसी पर भारी जुर्माना भी लगाया है। इस घटना को पूरे देश में ऑपरेशन सिंदूर कानून व्यवस्था और अनुशासन का संदेश देने वाली कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।
मेरठ-करनाल हाईवे पर टोल प्लाजा का विवाद
यह घटना 17 अगस्त 2025 को मेरठ-करनाल सेक्शन (NH-709A) के भुनी टोल प्लाजा पर हुई। यहां तैनात टोलकर्मियों ने एक जवान के साथ न सिर्फ दुर्व्यवहार किया बल्कि उसके साथ मारपीट तक की नौबत आ गई। सेना के जवान ने इस दुर्व्यवहार का विरोध किया तो टोलकर्मी और आक्रामक हो गए। यह मामला तुरंत स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया और फिर सोशल मीडिया पर भी तेजी से फैल गया।

ऑपरेशन सिंदूर के जवान से दुर्व्यवहार क्यों गंभीर है
सेना के जवान देश की सीमाओं पर खड़े होकर अपनी जान जोखिम में डालते हैं ताकि आम नागरिक चैन से रह सकें। ऐसे में जब एक जवान, जिसने ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियान में हिस्सा लिया हो, उसके साथ इस तरह का व्यवहार होता है तो यह सीधे तौर पर सेना के सम्मान और देश की सुरक्षा भावनाओं से जुड़ जाता है। इस घटना को जनता ने जवान के अपमान के रूप में देखा और हर तरफ से इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी गई।
NHAI की कड़ी कार्रवाई
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने मामले की जांच करने के बाद टोल एजेंसी पर बड़ा एक्शन लिया।
एजेंसी का कॉन्ट्रैक्ट तुरंत रद्द कर दिया गया
एक साल तक एजेंसी को किसी भी नई टोल बोली में हिस्सा लेने से रोक दिया गया
20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया
5 लाख रुपये की सिक्योरिटी जब्त कर ली गई
साथ ही 3.66 करोड़ रुपये की वसूली का आदेश भी जारी किया गया
यह कार्रवाई यह संदेश देने के लिए काफी है कि टोल प्लाजा पर यात्रियों, खासकर सेना के जवानों के साथ किसी भी तरह का दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जनता की प्रतिक्रिया
ऑपरेशन सिंदूर जवान के साथ मारपीट की खबर सामने आते ही स्थानीय लोगों से लेकर पूरे देश में गुस्से की लहर दौड़ गई। लोग सोशल मीडिया पर लगातार इस मामले में न्याय की मांग कर रहे थे। अधिकतर लोगों का मानना था कि सेना के जवानों को टोल प्लाजा से छूट मिलनी चाहिए क्योंकि वे देश की सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं।
सेना के जवान का सम्मान क्यों जरूरी है
भारतीय सेना हमेशा से अनुशासन, कर्तव्य और बलिदान का प्रतीक रही है। ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों में शामिल जवानों ने अपने जीवन की परवाह किए बिना देश की सुरक्षा की है। जब ऐसे जवानों को अपने ही देश में टोल प्लाजा पर अपमान झेलना पड़ता है, तो यह समाज के लिए भी शर्मनाक स्थिति बन जाती है।
NHAI की यह कार्रवाई न सिर्फ एक प्रशासनिक कदम है बल्कि जवानों के सम्मान की रक्षा की दिशा में भी एक बड़ा निर्णय है।
टोल प्लाजा पर होने वाले विवाद और समाधान
ऑपरेशन सिंदूर यह कोई पहली बार नहीं है जब टोल प्लाजा पर इस तरह का विवाद हुआ हो। आए दिन टोल कर्मियों और यात्रियों के बीच झगड़े की खबरें आती रहती हैं। इन विवादों की मुख्य वजह अनुशासन की कमी और गलत व्यवहार है।
समाधान के लिए कुछ अहम कदम उठाने जरूरी हैं
टोल कर्मियों को बेहतर प्रशिक्षण दिया जाए
यात्रियों के साथ सौम्य और अनुशासित व्यवहार पर जोर दिया जाए
सेना, पुलिस और अन्य विशेष सेवाओं से जुड़े लोगों को प्राथमिकता और सम्मान मिले
विवाद की स्थिति में तुरंत पुलिस की मदद ली जाए
NHAI की कार्रवाई का असर
ऑपरेशन सिंदूर इस कार्रवाई का सबसे बड़ा असर यह होगा कि टोल प्लाजा पर तैनात अन्य एजेंसियां और कर्मचारी अब ज्यादा सतर्क रहेंगे। उन्हें समझ आ गया है कि अगर उन्होंने यात्रियों खासकर सेना के जवानों के साथ गलत व्यवहार किया तो इसके गंभीर नतीजे भुगतने होंगे।
यह कदम देश में व्यवस्था और अनुशासन बनाए रखने के लिए एक उदाहरण साबित हो सकता है।
निष्कर्ष
मेरठ-करनाल हाईवे पर भुनी टोल प्लाजा पर हुए इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि आखिर टोल प्लाजा पर ऐसे मामले क्यों बार-बार होते हैं। हालांकि इस बार NHAI ने जिस तेजी और सख्ती से कदम उठाया है, उसने यह साफ कर दिया है कि किसी भी जवान या नागरिक के साथ दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सेना के जवान का सम्मान देश का सम्मान है और इस पर आंच आने का मतलब है पूरे राष्ट्र की भावनाओं को ठेस पहुंचाना। ऑपरेशन सिंदूर के जवान के साथ हुई इस घटना ने समाज को यह सिखाया है कि हमें उन लोगों को हमेशा सम्मान देना चाहिए जो हमारे लिए दिन-रात अपनी जान जोखिम में डालते हैं।